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परन्तु वैज्ञानिक प्रवृत्ति ने अपने अन्वेषण में यह महसूस किया कि बालक का विकास समाज के विकास के बिना असंभव है । अर्थात् व्यक्ति का हित समाज हित के साथ और समाज का हित व्यक्ति के हित से अनुपूरक रूप से गुथा हुआ है । दोनों का एकांगी विकास नहीं हो सकता इस आधुनिक युग […]